बचपन से नहीं हैं आखें, लेकिन जुनून ऐसा कि कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधितत्व करेंगी सरिता चौरे

जन्म से ही दृष्टिबाधित सरिता के पिता बांजराकला में ही मजदूरी करते हैं और अपने आर्थिक तंगी के बीच परिवार का पालन पोषण करते हैं. 

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बचपन से नहीं हैं आखें, लेकिन जुनून ऐसा कि कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधितत्व करेंगी सरिता चौरे बचपन से नहीं हैं आखें, लेकिन जुनून ऐसा कि कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधितत्व करेंगी सरिता चौरे Reviewed by RUPA on 20:04 Rating: 5

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